बुद्धि का अर्थ परिभाषा विशेषताएं प्रकार सिद्धांत बुद्धि लब्धि.....
बुद्धि का अर्थ
विभिन्न मनोवैज्ञानिक ने बुद्धि को अलग-अलग प्रकार से बताया है बुद्ध के स्वरूप के संबंध में मनोवैज्ञानिकों का एकमत नहीं है जिस प्रकार विद्युत एक शक्ति है उसके स्वरूप को औपचारिक भाषा में व्यक्त करना कठिन है ठीक उसी प्रकार बुद्धि भी एक सकती है जो जटिल मानसिक क्रियाओं स्मृति चिंतन कल्पना तक आदि को करने में मदद करती है इसका मापन किसी परीक्षा या परिवेश में व्यक्ति के कार्य को परिमाणात्मक विवरण के आधार पर किया जाता है बुद्ध के स्वरूप को समझने और व्याख्या करने का प्रयास प्राचीन काल से ही चला आ रहा है
बुद्धि की परिभाषाएं
स्टर्न के अनुसार, "जीवन की नवीन समस्याओं के प्रति समायोजन करने की सामान्य चेतन-क्षमता ही 'बुद्धि' है"
वुडवर्थ के अनुसार, "बुद्ध ज्ञान अर्जन करने की क्षमता है"
वेल्स के अनुसार, "बुद्धि का अर्थ संक्षेप में वह गुण है जिससे व्यक्ति नवीन परिस्थितियों में उत्तम प्रतिमानों का पुनर्योजन करता है"
टरमैन के अनुसार, "बुद्धि अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की योग्यता है"
गाल्टन के अनुसार, "बुद्धि पहचानने तथा सीखने की शक्ति है"
बुद्धि की विशेषताएं
- बुद्धि सीखने की क्षमता है
- बुद्धि अतीत के अनुभवों से लाभ उठाने की योग्यता है
- बुद्धि विभिन्न योग्यताओं का समूह है
- लिंग भेद के कारण बुद्धि में कोई अंतर नहीं होता है
- बुद्धि किसी भी समस्या को समझने का प्रयत्न करती है तथा समझकर मस्तिक को निर्णय लेने में मदद करती है
- बुद्धि आत्मनिरीक्षण की शक्ति होती है व्यक्ति द्वारा किए गए कार्यों और विचारों की आलोचना बुद्धि स्वयं से कर लेती है
- बुद्धि और ज्ञान में अंतर होता है
- बुद्धि द्वारा अर्जित ज्ञान का नई परिस्थितियों में उपयोग किया जा सकता है
- बुद्धि सभी प्रकार की विशिष्ट योग्यताओं का सार है
- बुद्धि वह शक्ति है जिसके द्वारा व्यक्ति कठिनाइयों को दूर करके परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार का संगठन करता है
- बुद्धि एक जन्मजात शक्ति है यह वंशानुक्रम से प्राप्त होती है
बुद्धि के प्रकार
बुद्धि के प्रकारों को निर्धारित कर पाना सरल नहीं है फिर भी कुछ मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि के तीन प्रकारों को बताया है
- मूर्त बुद्धि
- अमूर्त बुद्धि
- सामाजिक बुद्धि
1. मूर्त बुद्धि- किसी वस्तु या तथ्य को समझने और उसके अनुसार कार्य करने में इसी बुद्धि का प्रयोग होता है बुद्धि जो मनुष्यों को वस्तुओं के स्वरूप को समझने तथा अनुकूल क्रिया करने में सहयोग करती है उसे पैरंट ने मूर्त बुद्धि की संज्ञा दी है इसीलिए इस प्रकार को गत्यात्मक या यांत्रिक बुद्धि भी कहते हैं इस प्रकार की बुद्धि का प्रयोग उन कार्यों के लिए किया जाता है जिनमें कुछ उद्देश्य निहित होता है वह व्यक्ति जिनमें यह बुद्धि होती है यंत्रों एवं मशीनों से संबंधित कार्य में विशेष रूचि रखते हैं जिन लोगों में इस तरह की बुद्धि की अधिकता होती है वह वस्तुओं को तोड़ने फोड़ने में विशेष रुचि रखते हैं ऐसे बच्चे आगे चलकर कुशल कारीगर, मैकेनिक, इंजीनियर, टेक्नीशियन आदि बन सकते हैं
2. अमूर्त बुद्धि- अमूर्त बुद्धि का कार्य सूची तथा अमूर्त प्रश्नों को चिंतन के माध्यम से हल करना होता है यह बुद्धि मनुष्य को पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने में विभिन्न तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने में सोचने समझने में और समस्याओं के समाधान खोजने में सहायता करती है थार्नडाइक ने इसे अमूर्त बुद्धि की संज्ञा दी है
3. सामाजिक बुद्धि- इस बुद्धि का संबंध किसी व्यक्ति की उपयोगिता से होता है जिससे समाज में अनुकूलन की क्षमता उत्पन्न होती है अतः इस बुद्धि का प्रयोग सामाजिक और व्यक्तिगत कार्यों में होता है यदि मनुष्य को अपने समाज में समायोजन करने में और सामाजिक कार्यों में भाग लेने में सहायता करती है थार्नडाइक ने इसे सामाजिक बुद्धि की संज्ञा दी है
बुद्धि के सिद्धांत
मनोवैज्ञानिकों के द्वारा अलग-अलग समय बुद्धि के मापन के लिए अलग अलग सिद्धांत दिए हैं
- एक कारक सिद्धांत
- द्विकारक सिद्धांत
- त्रिकारक सिद्धांत
- बहुकारक सिद्धांत
- समूह कारक सिद्धांत
- पदानुक्रमिक सिद्धांत
- त्रिआयामी सिद्धांत
- द्रवीकृत घनिकृत बुद्धि सिद्धांत
- बहु बुद्धि सिद्धांत
- त्रि तंत्र सिद्धांत
इनमें से कुछ की चर्चा नीचे करेंगे
1. एक कारक सिद्धांत- बिने, टरमैन और स्टर्न अपने अध्ययनों से इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बुद्धि अपने में एक इकाई कारक, शक्ति एवं ऊर्जा है जो व्यक्ति की सभी क्रियाओं को प्रभावित करती है इस सिद्धांत के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की बुद्धि तीव्र है तो किसी भी कार्य को दक्षता के साथ कर सकता है इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि एक अविभाज्य इकाई हैं
2. द्वि कारक सिद्धांत- इस सिद्धांत को मनोवैज्ञानिक स्पियरमैन ने प्रतिपादित किया है इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि में दो कारक होते हैं
(i) सामान्य कारक
(ii) विशिष्ट कारक
स्पीयरमैन ने बुद्धि को दो योग्यताओं का योग माना है सामान्य कारक व्यक्तित्व को सभी प्रकार के कार्यों में सहायता करती है और विशिष्ट कारक विशेष कार्यों में सहायता करती है
3. त्रि कारक सिद्धांत- इस सिद्धांत से स्पियरमैन ने बुद्धि के 'G' और 'S' कारकों को एक साथ जोड़ दिया इस सिद्धांत के अनुसार बुद्धि परीक्षणों में तीन कारकों की आवश्यकता होती है
(i) सामान्य बुद्धि
(ii) विशिष्ट बुद्धि
(iii) भाषा या स्थानात्मक ज्ञान
4. बहु कारक सिद्धांत- अमेरिकन मनोवैज्ञानिक थार्नडाइक ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया इनके मतानुसार बुद्धि कई प्रकार की शक्तियों का समूह है और विभिन्न प्रकार की शक्तियों में किसी भी प्रकार की समानता आवश्यक नहीं है थॉर्डाइक बुद्धि के समान तत्व को नहीं मानते उनके विचार से सभी मनुष्य की बुद्धि विशेष होती है यदि किसी में एक विषय की योग्यता है तो दूसरे में किसी दूसरे विषय की योग्यता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है
5. समूह कारक सिद्धांत- शिकागो के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थस्टर्न और कैली ने कहा है कि बुद्धि मानसिक की योग्यताओं से बनी है कैली ने बुद्धि के निर्माण में 9 मानसिक योग्यताओं का उल्लेख किया है
I. सामाजिक योग्यता
II. वाचिक योग्यता
III. सांख्यिकी योग्यता
IV. क्रियात्मक योग्यता
V. शारीरिक योग्यता
VI. संगीतात्मक योग्यता
VII. यांत्रिक योग्यता
VIII. रुचि
IX. स्थानिक संबंधों के साथ व्यवहार करने की योग्यता
थस्टर्न ने भी विभिन्न परीक्षणों के बाद 7 मानसिक योग्यताएं बताइए
I. सांख्यिकी योग्यता
II. शाब्दिक योग्यता
III. स्थान संबंधी योग्यता
IV. शब्द प्रवाह योग्यता
V. वाचिक या तार्किक योग्यता
VI. स्मृति संबंधी योग्यता
VII. प्रत्यक्ष संबंधी योग्यता
बुद्धि परीक्षण या मापन
बुद्धि परीक्षण में शिक्षा मनोविज्ञान का सर्वोच्च योगदान है बुद्धि परीक्षण में बुद्धि के मापन के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले उपकरण है जब भी व्यक्तिक विभिन्नओं के मापन पर विचार किया जाता है तो बुद्धि भी उसी संदर्भ में देखी जाती है प्रत्येक व्यक्ति में बौद्धिक तथा मानसिक योग्यता भिन्न होती है शिक्षा तथा समाज के अन्य क्षेत्रों में बुद्धि मापन को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता रहा है तथा विभिन्न प्रकार के बुद्धि परीक्षणों से व्यक्ति के बुद्धि मापन का प्रयास होता रहा है
बुद्धि परीक्षण के प्रकार
बुद्धि परीक्षण के तीन प्रकार होते हैं
I. व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण
II. सामूहिक बुद्धि परीक्षण
III. निष्पादन बुद्धि परीक्षण या क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण
बुद्धि लब्धि
बुद्धि को मापने के लिए बुद्धि लब्धि का अविष्कार टरमैन किया था व्यक्ति की मानसिक आयु जान लेने से यह नहीं पता लग सकता कि वह तीव्र बुद्धि का है अथवा सामान्य बुद्धि का या फिर मंदबुद्धि का बुद्धि क्या है बुद्धि क्या है यह जानने के लिए पहले वास्तविक आयु तथा मानसिक आयु का पता लगाया जाता है तत्पश्चात निम्न सूत्र की सहायता से बुद्धि लब्धि ज्ञात की जाती है
उदाहरण के लिए यदि किसी बालक की मानसिक आयु 15 वर्ष है तथा वास्तविक आयु 12 वर्ष है तो उसकी बुद्धि लब्धि इस प्रकार प्राप्त की जा सकती है
125 की बुद्धि लब्धि का तात्पर्य यह है कि बालक प्रखर बुद्धि का है साधारणतया जिनकी बुद्धि लब्धि सौ के आसपास होती है उसे सामान्य बुद्धि माना जाता है
टरमैन बुद्धि लब्धि का वर्गीकरण निम्न प्रकार किया है
140 से अधिक प्रतिभाशाली
120 से 139 प्रखर बुद्धि
110 से 119 उत्कृष्ट बुद्धि
90 से 109 सामान्य बुद्धि
80 से 89 मंदबुद्धि
70 से 79 निर्बल बुद्धि
50 से 69 मूर्ख
25 से 49 मूढ़
25 से कम जड़ बुद्धि
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120 से 139 प्रखर बुद्धि
110 से 119 उत्कृष्ट बुद्धि
90 से 109 सामान्य बुद्धि
80 से 89 मंदबुद्धि
70 से 79 निर्बल बुद्धि
50 से 69 मूर्ख
25 से 49 मूढ़
25 से कम जड़ बुद्धि
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